Ranchi: आज के दौर में बच्चों का मोबाइल और इंटरनेट की ओर बढ़ता झुकाव अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, तकनीक की आसान उपलब्धता और माता-पिता की व्यस्त दिनचर्या इसकी बड़ी वजहें हैं. इस विषय पर डॉ. विकास कुमार ने बताया कि बच्चों में स्क्रीन की आदत अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि धीरे-धीरे यह लत का रूप लेती जा रही है.
कम उम्र में ही शुरू हो जाता है मोबाइल का इस्तेमाल
डॉ. विकास कुमार के अनुसार आज लगभग हर घर में स्मार्टफोन मौजूद है. कई माता-पिता बच्चों को खाना खिलाने, शांत कराने या व्यस्त रखने के लिए मोबाइल दे देते हैं. शुरुआत में यह आदत मामूली लगती है, लेकिन धीरे-धीरे बच्चे का लगाव मोबाइल से बढ़ने लगता है और वह बार-बार फोन मांगने लगता है.
इंटरनेट का आकर्षक कंटेंट खींच रहा बच्चों का ध्यान
मोबाइल पर मौजूद रंगीन वीडियो, कार्टून और गेम्स बच्चों को तेजी से आकर्षित करते हैं. इंटरनेट पर हर समय नया कंटेंट मिलने के कारण बच्चे लंबे समय तक स्क्रीन से जुड़े रहते हैं. इसका असर यह होता है कि वे धीरे-धीरे बाहर खेलने और दोस्तों के साथ समय बिताने से दूर होने लगते हैं.
माता-पिता की व्यस्तता भी बन रही वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में माता-पिता बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं. ऐसे में कई बच्चे अकेलापन महसूस करते हैं और मोबाइल को ही मनोरंजन का सबसे आसान साधन मानने लगते हैं.
ऑनलाइन पढ़ाई से बढ़ा स्क्रीन टाइम
डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन क्लासेस के कारण भी बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है. पढ़ाई के नाम पर बच्चे लंबे समय तक मोबाइल और टैबलेट का इस्तेमाल करते हैं. इसके बाद वे गेम्स, सोशल मीडिया और वीडियो देखने में भी समय बिताने लगते हैं. कई बार अभिभावकों को इसका अंदाजा भी नहीं हो पाता.
बच्चों में मोबाइल की लत के संकेत
डॉ. विकास कुमार के मुताबिक यदि बच्चे में ये बदलाव दिखाई दें तो सतर्क हो जाना चाहिए—
बार-बार मोबाइल मांगना
फोन न मिलने पर गुस्सा करना
पढ़ाई में ध्यान कम लगना
बाहर खेलने से बचना
देर रात तक मोबाइल चलाना
परिवार से बातचीत कम करना
बच्चों को मोबाइल की लत से कैसे बचाएं?
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि माता-पिता बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताएं और उन्हें आउटडोर गेम्स, किताबों और रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें. बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम तय करना जरूरी है. साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा मोबाइल पर क्या देख रहा है और कितनी देर तक उसका इस्तेमाल कर रहा है.
तकनीक का संतुलित इस्तेमाल जरूरी
डॉ. विकास कुमार का कहना है कि मोबाइल और इंटरनेट पूरी तरह गलत नहीं हैं, लेकिन उनका जरूरत से ज्यादा उपयोग बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है. इसलिए तकनीक का संतुलित और सीमित इस्तेमाल ही सबसे बेहतर उपाय है.