हजारीबाग: शांति, सौहार्द और सांस्कृतिक पहचान के लिए मशहूर हजारीबाग आज एक गंभीर सामाजिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। कभी अपनी ठंडी हवाओं, भाईचारे और सामूहिक उत्सवों के लिए पहचाना जाने वाला यह शहर अब चिंता और आत्ममंथन का विषय बनता जा रहा है।
हाल ही में रामनवमी के दौरान हुई घटनाओं ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। जहां एक ओर लोग भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मना रहे थे, वहीं दूसरी ओर कई परिवारों में दुख का माहौल था। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर समाज किस दिशा में बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इन घटनाओं के पीछे युवाओं में बढ़ता नशे का चलन और अवैध लॉटरी का जाल बड़ी वजह बनकर उभर रहा है। ब्राउन शुगर जैसे खतरनाक नशे युवाओं की सोच और समझ पर गहरा असर डाल रहे हैं, जिससे सही-गलत का फर्क धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है।
वहीं, अवैध लॉटरी आसान पैसे का लालच देकर युवाओं को मेहनत के रास्ते से भटका रही है। जब नशा और लालच एक साथ हावी होते हैं, तो इसका असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज में असंतुलन पैदा करता है।
इसी का परिणाम है कि युवा वर्ग में आक्रामकता और असंवेदनशीलता बढ़ती जा रही है। छोटी-छोटी बातें अब बड़े विवाद और हिंसा का रूप ले रही हैं। यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की गिरती चेतना का भी संकेत है।
शहर के बुद्धिजीवियों और बुजुर्गों का कहना है कि अगर समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। जरूरत है कि समाज, प्रशासन और परिवार सभी मिलकर युवाओं को सही मार्ग दिखाएं।
हजारीबाग सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि इसकी अपनी एक पहचान, विरासत और भविष्य है। अब सवाल यह है कि क्या हम इसे यूं ही बदलते हुए देखते रहेंगे, या मिलकर इसे बचाने की दिशा में ठोस पहल करेंगे।