Ranchi: देश से नक्सलवाद के खात्मे के लिए केंद्र सरकार द्वारा तय 31 मार्च 2026 की समयसीमा भले ही पूरी हो चुकी हो, लेकिन झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार राज्य का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा नक्सल मुक्त हो चुका है, जबकि शेष इलाकों में अभियान और तेज कर दिया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने 30 मार्च 2026 को संसद में कहा था कि देश तेजी से नक्सलवाद मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और बस्तर क्षेत्र में इसका प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है। हालांकि झारखंड के सारंडा जैसे कुछ क्षेत्रों में अब भी नक्सलियों की सीमित मौजूदगी बनी हुई है।
झारखंड पुलिस के आईजी अभियान डॉ. माइकल राज के अनुसार राज्य में अभियान अब अपने अंतिम मोड़ पर है और सुरक्षा बलों की पूरी रणनीति सारंडा क्षेत्र पर केंद्रित है। उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही एक बड़ी कार्रवाई से नक्सलियों की मौजूदगी पूरी तरह खत्म की जा सकती है।
पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल राज्य में करीब 48 इनामी नक्सली सक्रिय हैं। इनमें असीम मंडल उर्फ आकाश और मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जिन पर एक-एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, कुछ नक्सली सरेंडर के लिए भी संपर्क में हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नक्सली संगठन अब काफी कमजोर और बिखरा हुआ है तथा इसका दायरा मुख्य रूप से CPI (माओवादी) तक सिमट गया है। हालांकि TPC, PLFI और JJMP जैसे छोटे गुट अभी भी कुछ इलाकों में सक्रिय हैं। झारखंड में सक्रिय कई नक्सली कमांडर बाहरी राज्यों—बिहार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़—से जुड़े हुए हैं, जिनका प्रभाव स्थानीय कैडर पर अधिक है।
पिछले डेढ़ साल में सुरक्षा बलों को इस अभियान में उल्लेखनीय सफलता मिली है। जनवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच 58 नक्सली मारे गए, जबकि 45 ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता अपनाया। ‘ऑपरेशन मेगाबुरु’ और ‘ऑपरेशन डबल बुल’ के तहत उन दुर्गम क्षेत्रों में भी कार्रवाई की गई, जिन्हें कभी नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था।
फिलहाल, झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान अपने अंतिम चरण में है और सुरक्षा बल जल्द ही बड़ी सफलता हासिल करने की ओर बढ़ रहे हैं।