फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

Mahak Kumari
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Ranchi: फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर मनाया जाने वाला होलिका दहन भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख और आस्था से जुड़ा पर्व है। यह उत्सव केवल होली के रंगों की शुरुआत नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई और अहंकार पर भक्ति की विजय का संदेश देता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ होलिका दहन की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

कब है होलिका दहन 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 की शाम 5:55 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 की शाम 5:07 बजे तक रहेगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 2 मार्च को ही होलिका दहन किया जाएगा। परंपरा के अनुसार भद्रा काल में दहन नहीं किया जाता, इसलिए शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। अगले दिन रंगों की होली मनाई जाएगी।

प्रह्लाद की अटूट भक्ति की कहानी

होलिका दहन का संबंध पौराणिक कथा से जुड़ा है। असुर राजा हिरण्यकशिपु ने कठोर तप कर वरदान प्राप्त किया और स्वयं को भगवान मानने लगा। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। पिता के विरोध और अत्याचारों के बावजूद प्रह्लाद अपनी भक्ति से पीछे नहीं हटे।

क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका की सहायता ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। योजना के तहत होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, लेकिन दैवी कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका अग्नि में भस्म हो गई। तभी से यह पर्व बुराई के अंत और भक्ति की विजय के रूप में मनाया जाता है।

धार्मिक और सामाजिक महत्व

होलिका दहन के दौरान लोग अग्नि की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि और परिवार की रक्षा की कामना करते हैं। अग्नि की राख को शुभ माना जाता है और इसे माथे पर लगाने की परंपरा भी है।

यह पर्व सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। मोहल्लों और गांवों में लोग मिलकर लकड़ियां और उपले इकट्ठा करते हैं और सामूहिक रूप से होलिका दहन करते हैं। इससे आपसी प्रेम और भाईचारा मजबूत होता है।

रंगों के उत्सव की शुरुआत

होलिका दहन के अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव कई दिनों तक चलता है और देश-विदेश से लोग यहां की परंपरागत होली देखने पहुंचते हैं।

आत्मशुद्धि का संदेश

होलिका दहन हमें यह सीख देता है कि जीवन में सत्य और भक्ति का मार्ग ही सर्वोपरि है। यह पर्व अपने भीतर की नकारात्मकताओं—क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या—को त्यागकर नई सकारात्मक शुरुआत करने का अवसर प्रदान करता है।

इस फाल्गुन पूर्णिमा पर आइए, हम भी बुराइयों को त्यागकर प्रेम, शांति और सद्भाव के साथ होली का स्वागत करें।

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