News Desk: असम विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की एंट्री को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच पार्टी के महासचिव विनोद पांडेय ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि जेएमएम का असम जाना किसी राजनीतिक समीकरण को साधने के लिए नहीं, बल्कि टी-ट्राइब्स समुदाय के अधिकारों की आवाज उठाने के उद्देश्य से हुआ है।
पांडेय के मुताबिक, असम के टी-ट्राइब्स संगठनों ने खुद पार्टी को आमंत्रित किया था और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विशेष रूप से बुलाया गया था। इसी निमंत्रण के आधार पर जेएमएम ने वहां चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड और असम के चाय बागान श्रमिकों के बीच गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध है, जिससे पार्टी पहले से ही उनके मुद्दों से जुड़ी रही है।
उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जेएमएम किसी दल को फायदा पहुंचाने या वोट काटने की राजनीति नहीं करती। पार्टी का मकसद सिर्फ शोषित और वंचित वर्गों, खासकर टी-ट्राइब्स के हक, सम्मान और बेहतर जीवन के लिए संघर्ष करना है।
असम की 126 सीटों में से 16 पर उम्मीदवार उतारने वाली जेएमएम को कुछ क्षेत्रों में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। हालांकि, पांडेय ने कहा कि सीटों की संख्या से ज्यादा अहम वहां के लोगों का भरोसा और समर्थन है।
उन्होंने दोहराया कि चुनाव परिणाम चाहे जो भी हों, जेएमएम असम में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगी और संगठन को मजबूत करते हुए टी-ट्राइब्स समेत पिछड़े वर्गों की लड़ाई आगे भी जारी रखेगी।