रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने करीब 28 साल पुराने हत्या के मामले में सुनवाई करते हुए दो आरोपियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई उम्रकैद की सजा को रद्द करते हुए दोनों को बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्यों की विश्वसनीयता और आरोप साबित होने की स्थिति की समीक्षा के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष को आरोप संदेह से परे साबित करना जरूरी है। यदि उपलब्ध साक्ष्य इस कसौटी पर खरे नहीं उतरते हैं, तो आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। बताया गया कि यह मामला करीब तीन दशक पहले हुई हत्या से जुड़ा था। मामले में निचली अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोनों ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केस में मौजूद साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की पड़ताल की। अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों में ऐसी कमियां पाईं, जिनके आधार पर दोषसिद्धि को बरकरार रखना उचित नहीं माना गया। इसके बाद कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला रद्द करते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में 1996 के एक पुराने हत्या मामले में हाईकोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा रद्द कर आरोपी को बरी करने का फैसला दर्ज है; हालांकि वह मामला एक आरोपी से संबंधित बताया गया है। इसलिए ऊपर की कॉपी में दो आरोपियों के नाम/मामले के विशिष्ट तथ्य नहीं जोड़े गए हैं, ताकि गलत जानकारी प्रकाशित न हो।