रांची: JSSC की विभिन्न परीक्षाओं और JSSC-CGL के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रौशन की अदालत ने सुनवाई के दौरान नवनियुक्त अफसरों को राहत देते हुए सरकार के आदेश पर लगी रोक को बरकरार रखा।
JSSC-CGL परीक्षा में सफल होकर नियुक्त हुए कई अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया है। निरोज कुमार खेस, रमेश उरांव समेत सैकड़ों प्रार्थियों की याचिकाओं पर अदालत में सुनवाई हुई। प्रार्थियों की ओर से पूर्व महाधिवक्ता एवं वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन के साथ इंद्रजीत सिन्हा, कुमार हर्ष, अमृतांश वत्स, दीपांकर राय, अर्पण मिश्रा और अंकित विशाल ने पक्ष रखा।
48 घंटे में सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय मांगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि मामला बड़ी संख्या में लोगों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए जवाब दाखिल करने में ज्यादा समय देना उचित नहीं होगा।
अदालत ने राज्य सरकार को 48 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
जांच को लेकर कोर्ट ने जताई टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की गति को लेकर भी मौखिक टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि उसे पुलिस की जांच पर पूरा भरोसा है, लेकिन शुरुआती जांच के बाद आगे की जांच की रफ्तार कुछ धीमी हुई है।
फिलहाल सरकार के आदेश पर रोक जारी रहने से JSSC-CGL के जरिए चयनित और नियुक्त हुए अफसरों को राहत मिली है। अब 17 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर सरकार के जवाब और अदालत के अगले रुख पर सभी की नजरें रहेंगी।