रांची: रिम्स की अधिग्रहित जमीन से जुड़े चर्चित जमीन घोटाले में आरोपी लवली देवी को बड़ा झटका लगा है। एसीबी की विशेष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया। मामले की पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने एसीबी और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 31 जुलाई को आदेश सुनाते हुए कोर्ट ने अग्रिम जमानत की मांग ठुकरा दी।यह मामला रांची स्थित रिम्स की करीब सात एकड़ अधिग्रहित जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि फर्जी वंशावली और दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन को निजी संपत्ति के रूप में दिखाया गया और बाद में उसे बिल्डरों को बेच दिया गया। एसीबी अब तक इस मामले में कई प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दायरे में 16 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी बताए जा रहे हैं। झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर चल रही जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि वर्ष 1964-65 में सरकार द्वारा अधिग्रहित की गई जमीन को भू-माफियाओं ने फर्जी कागजात के सहारे निजी भूमि बताकर करोड़ों रुपये के सौदे किए। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।