हजारीबाग सदर अंचल कार्यालय को बिचौलियों से मुक्त कराने की मांग, चैंबर ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

Mahak Kumari
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हजारीबाग: हजारीबाग चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने सदर अंचल कार्यालय में कथित रूप से बढ़ते बिचौलिया तंत्र और आम लोगों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है। चैंबर के अध्यक्ष राजकुमार जैन टोंग्या, सचिव विजय केसरी तथा संस्थापक अध्यक्ष राजेंद्र लाल ने मुख्यमंत्री से अंचल कार्यालय को बिचौलियों के प्रभाव से मुक्त कराने का आग्रह किया है।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि अंचल कार्यालय के कुछ पदाधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से बिचौलियों का नेटवर्क सक्रिय है, जिसके कारण आम लोगों को छोटे-छोटे सरकारी कार्यों के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों को स्कूल और कॉलेज से संबंधित प्रमाण पत्र एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

चैंबर ने कहा कि दाखिल-खारिज से संबंधित कई आवेदनों को बिना उचित कारण के वापस कर दिया जाता है, जिससे सैकड़ों मामले लंबित पड़े हुए हैं। संगठन ने सवाल उठाया कि यदि बिचौलियों के माध्यम से दी गई संचिकाओं का त्वरित निष्पादन हो सकता है, तो आम नागरिकों के मामलों में देरी क्यों की जा रही है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्य सरकार लगातार सरकारी कार्यालयों को आम जनता के कार्यों में अनावश्यक विलंब न करने और लोगों को बार-बार न दौड़ाने के निर्देश देती रही है। इसके बावजूद लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है, जिससे न केवल जनता परेशान है बल्कि सरकार को राजस्व की भी क्षति हो रही है।

चैंबर ने स्पष्ट किया कि सीएनटी एक्ट और खासमहल भूमि से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए, लेकिन रैयती भूमि से जुड़े मामलों को अनावश्यक रूप से रोकना लालफीताशाही और अफसरशाही को बढ़ावा देने जैसा है। संगठन ने कहा कि झारखंड राज्य का गठन जनता को ऐसी समस्याओं से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से हुआ था, लेकिन 25 वर्ष बाद भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

चैंबर ने मुख्यमंत्री से शीघ्र हस्तक्षेप कर सदर अंचल कार्यालय को बिचौलियों से मुक्त कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो हजारीबाग चैंबर ऑफ कॉमर्स अहिंसात्मक आंदोलन, धरना, प्रदर्शन और बंद जैसे कार्यक्रमों के लिए बाध्य होगा।

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