Ranchi: Hemant Soren ने रविवार को Sonari Assembly Constituency में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए असम की वर्तमान राजनीतिक हालात पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने लोगों से कहा कि अब वक्त आ गया है जब राज्य को सिर्फ कागजी विकास से आगे बढ़ाकर जमीनी हकीकत में बदलाव लाना होगा।
सोरेन ने अपने भाषण में कहा कि असली विकास आंकड़ों से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में दिखने वाली खुशहाली से मापा जाता है। उन्होंने कहा कि जब तक गरीबों के घर में चूल्हा नहीं जलेगा और उनके चेहरे पर संतोष नहीं दिखेगा, तब तक विकास अधूरा रहेगा। उनके अनुसार, असम की जनता अब खोखले वादों और दिखावटी उपलब्धियों से परेशान हो चुकी है।
झारखंड की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ-साथ स्थानीय पहचान को मजबूत करने पर काम कर रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसी मॉडल को अपनाकर असम में भी युवाओं को वास्तविक रोजगार के अवसर दिए जा सकते हैं, न कि केवल वादों तक सीमित रखा जाए।
इसके अलावा, उन्होंने चाय बागान श्रमिकों और मेहनतकश वर्ग के अधिकारों की बात करते हुए कहा कि उन्हें उचित हक और सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। साथ ही, आदिवासी और मूल निवासियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया, खासकर जल, जंगल और जमीन पर उनके हक को लेकर।
अपने संबोधन के अंत में सोरेन ने कहा कि असम की जनता अब जागरूक हो चुकी है और आने वाले समय में राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जो जनभावनाओं और स्थानीय अधिकारों पर आधारित होगा।