रांची: वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्ति की ओर है, लेकिन झारखंड सरकार के कई विभाग अब तक अपने बजट का पूरा उपयोग नहीं कर सके हैं। सरकार ने अब तक करीब 1.11 लाख करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है, जबकि 91 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं।
राज्य का कुल बजट 1.45 लाख करोड़ रुपये है, लेकिन खर्च की धीमी रफ्तार को देखते हुए अंदेशा जताया जा रहा है कि 20 से 25 हजार करोड़ रुपये तक की राशि वापस (सरेंडर) करनी पड़ सकती है।
आखिरी महीने में खर्च की सीमा बनी बाधा
वित्तीय नियमों के तहत अंतिम महीने में विभाग अधिकतम 15% राशि ही खर्च कर सकते हैं। ऐसे में जिन विभागों ने पूरे साल खर्च में सुस्ती दिखाई, उनके लिए अब शेष बजट का उपयोग करना कठिन हो गया है।
कई विभाग अभी भी लक्ष्य से काफी पीछे हैं:
कृषि विभाग को 1000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करना बाकी
पशुपालन, श्रम, पेयजल और पंचायती राज विभाग आधे बजट तक भी नहीं पहुंच पाए
वित्त विभाग का निर्देश
वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि जो राशि खर्च नहीं हो सकती, उसे 31 मार्च तक ऑनलाइन सरेंडर कर दें।
तय समय सीमा तक खर्च या सरेंडर नहीं होने पर राशि लैप्स मानी जाएगी।
विभागवार खर्च की स्थिति
ऊर्जा: 10,480 करोड़ में 8,746 करोड़ खर्च
स्वास्थ्य: 5,437 करोड़ में 4,433 करोड़ खर्च
गृह: 8,535 करोड़ में 7,711 करोड़ खर्च
ग्रामीण विकास: 6,641 करोड़ में 3,551 करोड़ खर्च
पेयजल: 3,841 करोड़ में 1,122 करोड़ खर्च
पंचायती राज: 1,427 करोड़ में 525 करोड़ खर्च
क्या कहते हैं हालात?
बजट खर्च की धीमी गति इस बात का संकेत है कि कई योजनाएं अभी तक पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाई हैं। इसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ सकता है।
अब नजर इस पर रहेगी कि बची हुई अवधि में विभाग खर्च की रफ्तार बढ़ा पाते हैं या फिर बड़ी राशि वापस करनी पड़ेगी।