रांची: दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी विरोध-प्रदर्शन को देशव्यापी आंदोलन का रूप देने की चर्चा के बीच झारखंड में भी विभिन्न संगठनों को एकजुट करने की पहल की बात सामने आई है। कांग्रेस की झारखंड वर्किंग कमेटी की सदस्य कायनात कंजम ने लोकतांत्रिक अधिकारों, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग का समर्थन करते हुए लोकतांत्रिक, महिला और छात्र संगठनों से एक मंच पर आने की अपील की है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर जोर
कायनात कंजम ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे और मुंबई जैसे शहरों में प्रदर्शनकारियों को पर्याप्त जगह और अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि झारखंड में भी विभिन्न लोकतांत्रिक, महिला और छात्र संगठनों के साथ संवाद कर आंदोलन को व्यापक बनाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी निश्चित कार्यक्रम की तारीख या विस्तृत रूपरेखा की जानकारी सामने नहीं आई है।
SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची पर उठाए सवाल
कायनात कंजम ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए चुनाव आयोग से पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 और आयोग के सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।उन्होंने गोवा और पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने से संबंधित कुछ आवेदनों पर केंद्रीय स्तर से आपत्तियां दर्ज की गईं और उन्हें खारिज किया गया। उनके अनुसार, मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और उनकी प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित मामलों में चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग का समर्थन
कांग्रेस नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर आयोग के कामकाज को प्रभावित करने के आरोप लगाए। कायनात कंजम का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन, नागरिकों के मताधिकार और चुनाव से संबंधित निर्णयों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने इन मुद्दों को संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा से जोड़ते हुए विभिन्न संगठनों से एकजुट होने का आह्वान किया।
झारखंड में आगे क्या होगा?
कायनात कंजम के बयान के बाद अब नजर इस बात पर है कि झारखंड में विभिन्न संगठनों को एक मंच पर लाने की पहल किस दिशा में आगे बढ़ती है। प्रस्तावित आंदोलन में किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी और इसका स्वरूप क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं, SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए गए सवालों पर संबंधित आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।