रांची: लोहरदगा के बहुचर्चित हत्याकांड में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम आदेश पारित किया है। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा भुगत रहे गुलाम गौश अंसारी की सजा को हाईकोर्ट ने निलंबित कर दिया है। अदालत ने उसे नियमित जमानत पर रिहा करने का भी निर्देश दिया है।
सबूतों की समीक्षा के बाद अदालत ने दी राहत
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों की जांच की। अदालत के अनुसार, घटना वाले दिन पीड़ित के घर जाना और सह-आरोपी से फोन पर संपर्क होना मात्र किसी व्यक्ति को हत्या की साजिश का मुख्य आरोपी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
अंतिम समय में पीड़ित ने नहीं लिया था नाम
मामले में पीड़ित के अंतिम समय के बयान को भी अदालत ने महत्वपूर्ण माना। बताया गया कि घायल अवस्था में पीड़ित होश में था और उसने अपने परिजनों को हमलावरों के नाम बताए थे। इस दौरान मुख्य शूटर समेत कुछ अन्य लोगों का नाम सामने आया, लेकिन गुलाम गौश का नाम नहीं लिया गया।
बाइक की बरामदगी पर भी जांच में सवाल
पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल बाइक की बरामदगी का दावा किया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी बाइक के मालिकाना हक और कथित बरामदगी को पुख्ता तौर पर साबित नहीं कर सके। हाईकोर्ट ने साक्ष्यों का आकलन करते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखा।
2017 में हुई थी हत्या
यह मामला वर्ष 2017 का है। लोहरदगा के कुड़ू थाना क्षेत्र में धान खरीदने के बहाने एक युवक को नदी किनारे ले जाया गया था। वहीं गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई थी। मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने वर्ष 2020 में चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।इसके बाद आरोपियों ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा के बाद हाईकोर्ट ने गुलाम गौश अंसारी की सजा निलंबित करते हुए 10 हजार रुपये के मुचलके पर नियमित जमानत देने का आदेश दिया।