बोकारो: चास स्थित एक जमीन को लेकर सामने आए विवाद में बोकारो जिला न्यायालय ने बैंक ऑफ बड़ौदा समेत संबंधित बैंकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। जिला न्यायालय के सीनियर जज अनुज कुमार ने बैंक ऑफ बड़ौदा, चास शाखा, पंजाब एंड सिंध बैंक सहित अन्य संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि गुरप्रीत सिंह के पक्ष में इंजंक्शन (निषेधाज्ञा) क्यों नहीं दिया जाए।
तीसरे हिस्सेदार की जानकारी और हस्ताक्षर के बिना लोन का आरोप
मामला चास में स्थित एक संयुक्त पारिवारिक संपत्ति से जुड़ा है। बताया गया है कि इस जमीन में तीन लोगों का हिस्सा है। आरोप है कि परिवार के दो सदस्यों ने वर्ष 2019 में बैंक ऑफ बड़ौदा से करीब 65 लाख रुपये का लोन लिया था।गुरप्रीत सिंह का दावा है कि बैंक ने जमीन को लेकर लोन स्वीकृत करते समय तीसरे हिस्सेदार की जानकारी और सहमति नहीं ली। आरोप यह भी है कि संबंधित हिस्सेदार के हस्ताक्षर के बिना ही जमीन को लोन के लिए इस्तेमाल किया गया।
25 अगस्त को होने वाली थी जमीन की नीलामी
गुरप्रीत सिंह को जब इस मामले की जानकारी मिली कि बैंक ने विवादित संपत्ति को 25 अगस्त को नीलामी के लिए रखा है, तो उन्होंने नीलामी के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। याचिका में उन्होंने संपत्ति से जुड़े दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए और दावा किया कि जमीन में उनका भी हिस्सा है तथा उनकी सहमति के बिना संपत्ति को बैंक के कर्ज के लिए इस्तेमाल किया गया।
दस्तावेजों की जांच के बाद कोर्ट का निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने गुरप्रीत सिंह द्वारा प्रस्तुत किए गए संपत्ति संबंधी दस्तावेजों का बारीकी से अवलोकन किया। इसके बाद सीनियर जज अनुज कुमार ने बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब एंड सिंध बैंक सहित संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। न्यायालय ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है कि ऐसी स्थिति में गुरप्रीत सिंह के पक्ष में इंजंक्शन यानी निषेधाज्ञा क्यों नहीं जारी की जाए।फिलहाल मामले में बैंक और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब के बाद आगे की न्यायिक कार्रवाई तय होगी। विवादित संपत्ति की नीलामी और उस पर बैंक के दावे को लेकर अब न्यायालय की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।