चतरा: दक्षिणी वन प्रमंडल एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला रिटायर हो चुके रेंजर सूर्यभूषण कुमार की कथित सक्रियता को लेकर गरमा गया है। आरोप है कि सेवा अवधि खत्म होने के बाद भी वे दफ्तर और फील्ड में प्रभाव बनाए हुए हैं, जिससे विभागीय नियमों पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक, सूर्यभूषण कुमार 28 फरवरी 2025 को रिटायर हुए थे। इसके बाद उन्हें एक साल का सेवा विस्तार दिया गया, जो 28 फरवरी 2026 को समाप्त हो गया। बावजूद इसके, उनके कार्यालय में सक्रिय रहने और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल की चर्चा जारी है।
कागजों में बदलाव, जमीन पर पुरानी स्थिति
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार चतरा वन क्षेत्र का प्रभार प्रतापपुर रेंजर को सौंप दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग बताई जा रही है। अधीनस्थ कर्मचारियों के बीच अब भी सूर्यभूषण कुमार का प्रभाव कायम है और उनके निर्देशों पर काम होने की बात सामने आ रही है।
संवेदकों ने लगाए आरोप
विभाग से जुड़े संवेदकों का कहना है कि भुगतान और कार्य निष्पादन से जुड़े मामलों में उन्हें अब भी सूर्यभूषण कुमार से ही संपर्क करने को कहा जाता है। मार्च क्लोजिंग के दौरान भी उनके पास लोगों की भीड़ देखी गई, जो उनकी सक्रिय भूमिका की ओर इशारा करती है।
फिर सेवा विस्तार की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, सूर्यभूषण कुमार को एक और सेवा विस्तार मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसी उम्मीद में वे चतरा में बने हुए हैं और इस सिलसिले में रांची के दौरे भी कर रहे हैं।
DFO ने दिए जांच के संकेत
वन प्रमंडल पदाधिकारी मुकेश कुमार ने साफ कहा कि रिटायरमेंट के बाद किसी भी कर्मी द्वारा सरकारी संसाधनों का उपयोग पूरी तरह नियमों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो कार्यालय में उपस्थिति की अनुमति है और न ही सरकारी वाहन या स्टाफ के साथ क्षेत्र भ्रमण की।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम ने वन विभाग की पारदर्शिता और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।