बजट सत्र में प्रवासी मजदूरों का मुद्दा गरमाया, पांच राज्यों में निदेशालय बनाने की तैयारी

Mahak Kumari
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रांची: विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सदन में प्रवासी मजदूरों की समस्याएं प्रमुखता से उठीं। विधायक जयराम महतो और अरूप चटर्जी ने राज्य से बाहर काम कर रहे श्रमिकों के पंजीकरण, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।

जयराम महतो ने कहा कि झारखंड के लगभग 16 लाख प्रवासी मजदूरों में से सिर्फ 1 लाख 91 हजार का ही अब तक पंजीकरण हुआ है। उन्होंने प्रवासी श्रमिकों के लिए अलग आयोग गठित करने और पंजीकरण प्रक्रिया तेज करने पर जोर दिया, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके।

सरकार का जवाब: प्रक्रिया जारी, केंद्र सक्रिय

विभागीय मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस विषय पर गंभीर है। राज्य में प्रवासी मजदूर सूचना केंद्र कार्यरत है और रजिस्ट्रेशन अभियान लगातार चल रहा है। जहां भी किसी मजदूर को समस्या होती है, वहां तत्काल कार्रवाई की जाती है।

मंत्री ने बताया कि सामान्य मृत्यु की स्थिति में प्रवासी मजदूर के परिजनों को 50 हजार रुपये की सहायता दी जाती है। इस राशि को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से चर्चा कर इस पर निर्णय लिया जाएगा।

भाषा और इलाज की समस्या पर विपक्ष की चिंता

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बाहर काम करने वाले मजदूरों को भाषा और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर काफी परेशानी होती है। खासकर मद्रास, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में सहायता तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने सुझाव दिया कि जिन मजदूरों की मृत्यु हो जाती है, उनके परिवारों को सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और राशन की भी स्थायी व्यवस्था की जानी चाहिए।

पांच राज्यों में प्रवासी केंद्र खोलने की पहल

विधायक अरूप चटर्जी ने प्रवासी मजदूरों के लिए अलग निदेशालय बनाने की मांग दोहराई। मंत्री ने बताया कि पांच राज्यों में प्रवासी केंद्र स्थापित करने और अधिकारियों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

फिलहाल आत्महत्या या अन्य असामान्य परिस्थितियों में मृत्यु के मामलों में आर्थिक सहायता का प्रावधान नहीं है, लेकिन सरकार ने इस पर भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि इस विषय में मुख्यमंत्री से चर्चा कर आगे कदम उठाए जाएंगे।
सदन में हुई इस चर्चा के बाद अब सरकार से प्रवासी मजदूरों के लिए ठोस नीति और मजबूत तंत्र की उम्मीद बढ़ गई है।

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