Ranchi: झारखंड पुलिस महकमे में इन दिनों सख्ती का दौर जारी है। बीते महज 33 दिनों के भीतर राज्य के अलग-अलग जिलों में 18 सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) स्तर के अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। इनमें कई अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि कई को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इस कार्रवाई से विभाग ने साफ संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार और कर्तव्य में लापरवाही को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
11 अप्रैल को बोकारो जिले के पिंडराजोड़ा थाना में अभियुक्त से सांठगांठ के आरोप में एक साथ बड़ी कार्रवाई की गई। यहां तैनात सभी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया, जिनमें 10 सब-इंस्पेक्टर, 5 एएसआई, 2 हवलदार और 11 सिपाही शामिल हैं। इसी दिन चंद्रपुरा थाना प्रभारी अजय कुमार सिंह को भी कर्तव्य में लापरवाही और रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
9 अप्रैल को चतरा जिले के गिद्धौर थाना प्रभारी समेत दो पुलिसकर्मियों को एक वायरल वीडियो के आधार पर सस्पेंड किया गया, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए थे।
2 अप्रैल को पलामू के हुसैनाबाद थाना में तैनात एसआई नर्मदेश्वर सिंह पर रंगदारी मांगने और एक चाय दुकानदार से मारपीट के आरोप में निलंबन और लाइन हाजिर की कार्रवाई की गई।
30 मार्च को धनबाद के राजगंज थाना प्रभारी अलीशा कुमारी को वर्दी में भोजपुरी गाने पर डांस करने का वीडियो वायरल होने के बाद लाइन हाजिर किया गया।
27 मार्च को गढ़वा के रमकंडा में रामनवमी जुलूस के दौरान विवाद के बाद थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह कुंटिया को कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में लाइन हाजिर किया गया।
इसके अलावा 17 मार्च को रांची के कांके थाना प्रभारी प्रकाश रजक को जमीन कारोबारियों से कथित मिलीभगत के आरोप में लाइन हाजिर किया गया, जबकि 10 मार्च को सब-इंस्पेक्टर भवेश कुमार रवानी को अनुशासनहीनता और लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया था।
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और अधिकारियों के बीच जवाबदेही को लेकर सख्त संदेश गया है।