रांची: मांडर विधानसभा क्षेत्र की विधायक एवं कांग्रेस नेत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने 27 अगस्त को सभी जिला मुख्यालयों में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन और 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में होने वाली आदिवासी एकता महाजुटान रैली की तैयारियों को लेकर कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए संगठन को पंचायत और बूथ स्तर तक सक्रिय करने पर जोर दिया गया। बैठक में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने और क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने की रणनीति बनाई गई। शिल्पी नेहा तिर्की ने कार्यकर्ताओं से दोनों कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत के साथ जुटने का आह्वान किया।
राजनीतिक हिस्सेदारी कम करने की कोशिश का विरोध
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज की लड़ाई केवल अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक हिस्सेदारी, संवैधानिक अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा से भी जुड़ी है। उन्होंने कहा कि परिसीमन के नाम पर आदिवासी समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी या आरक्षित सीटों में किसी भी तरह की कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी। झारखंड की पहचान और जल, जंगल, जमीन से जुड़े अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व ही अधिकारों की सबसे मजबूत आवाज है। आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से मजबूती से विरोध किया जाएगा। कांग्रेस नेत्री ने कार्यकर्ताओं से 30 अगस्त की महाजुटान रैली को ऐतिहासिक बनाने के लिए गांव, पंचायत और बूथ स्तर पर जनसंपर्क तेज करने की अपील की।