रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रकृति पर्व सरहुल के मौके पर राज्यवासियों को बधाई देते हुए पर्यावरण संरक्षण का अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सरहुल का पर्व पूरे झारखंड और देश के अन्य हिस्सों में पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वसंत ऋतु के आगमन के साथ जब साल के पेड़ों पर नए फूल खिलते हैं, तब प्रकृति अपनी पूरी खूबसूरती में नजर आती है। सरहुल इसी प्राकृतिक नवजीवन और जनजातीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का प्रतीक है, जो हमें प्रकृति के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का बोध कराता है।
उन्होंने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के अटूट संबंध का उत्सव है। आदिवासी परंपराओं में इस दिन धरती और सूर्य के मिलन के रूप में प्रकृति की पूजा की जाती है, जो जीवन के मूल स्रोतों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर देता है।
सीएम सोरेन ने कहा कि आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है, तब सरहुल का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। ‘जल, जंगल और जमीन’ की सुरक्षा को उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य की नींव बताया।
अंत में मुख्यमंत्री ने सभी लोगों से अपील की कि वे सरहुल के संदेश को अपने जीवन में उतारें और प्रकृति के संरक्षण में सक्रिय योगदान दें।