रांची: वित्तीय वर्ष 2025-26 के खत्म होने में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं, जिसके चलते सरकारी विभागों में बजट खर्च करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। कुल ₹1.45 लाख करोड़ के बजट में से अब तक ₹1.10 लाख करोड़ से अधिक राशि की स्वीकृति दी जा चुकी है, जबकि करीब ₹95 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
खर्च के आंकड़ों पर नजर डालें तो केंद्र प्रायोजित योजनाओं में अभी भी सुस्ती बनी हुई है, जहां महज 34 फीसदी राशि ही खर्च हो पाई है। वहीं, राज्य योजना मद में 65 फीसदी से अधिक राशि का उपयोग किया जा चुका है।
इस बीच वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार ने सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिन योजनाओं की राशि चालू वित्तीय वर्ष में खर्च नहीं हो पाएगी, उसे 31 मार्च तक ऑनलाइन सरेंडर करना होगा। साथ ही, सरेंडर के पीछे के कारणों का स्पष्ट उल्लेख करना भी जरूरी होगा।
उन्होंने यह भी कहा है कि तय समयसीमा तक जो राशि न खर्च की जाएगी और न ही सरेंडर होगी, उसे स्वतः लैप्स माना जाएगा। राहत की बात यह है कि राशि सरेंडर करने के लिए वित्त विभाग से पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।