रामगढ़: जेल में आत्महत्या की घटना के सात साल बाद आशीष मुंडा के परिवार को आखिरकार आर्थिक मदद मिली है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की अनुशंसा पर झारखंड सरकार ने मृतक के नौ वर्षीय बेटे को पांच लाख रुपये की सहायता राशि देने का फैसला लिया है। इसको लेकर गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने रामगढ़ के उपायुक्त को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
आशीष मुंडा, जो एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोप में रामगढ़ जेल में बंद था, ने 28 अगस्त को जेल के बाथरूम में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी। घटना के बाद पोस्टमार्टम हुआ, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण परिवार शव को अपने गांव जामसिघ नहीं ले जा सका।
मृतक के पिता अजय मुंडा ने गरीबी का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार करने में असमर्थता जताई थी। इसके बाद जेल प्रशासन की मदद से शव को एंबुलेंस के जरिए दामोदर घाट ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।
सालों बाद मिली इस आर्थिक सहायता से परिवार को कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।