झारखंड में भ्रष्टाचार पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई: 3% कमीशन रैकेट बेनकाब, 100+ इंजीनियर रडार पर

Mahak Kumari
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रांची: झारखंड में विकास योजनाओं में व्यापक भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद इंजीनियरिंग सिस्टम पर बड़ी कार्रवाई तेज हो गई है। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ इंजीनियरों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। ग्रामीण विकास विभाग में तय 3 प्रतिशत कमीशन के संगठित नेटवर्क के सामने आने से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।

पिछले दो वर्षों में केंद्रीय और राज्य स्तर की जांच एजेंसियों ने कई बड़े अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की है। इस दौरान चीफ इंजीनियर स्तर तक के अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई है। मार्च 2026 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 14 और इंजीनियरों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूरक चार्जशीट दाखिल कर मामले को और गंभीर बना दिया है।

राज्य गठन के बाद से अब तक 100 से अधिक इंजीनियर भ्रष्टाचार के मामलों में फंस चुके हैं। कई अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया, जबकि कई पर आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के केस दर्ज हैं।

विभागवार जांच की स्थिति:

पथ निर्माण विभाग:

अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार सिंह के ठिकानों पर आयकर छापे में 4.06 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ। वहीं, सचिव स्तर के अधिकारी सुनील कुमार पर करीब 100 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले के आरोप लगे हैं।

जल संसाधन विभाग:

राज्य सरकार ने 37 इंजीनियरों को चिन्हित किया है, जिन पर सिंचाई परियोजनाओं में अनियमितता के आरोप हैं। इनमें से 15 सेवानिवृत्त इंजीनियरों से वसूली की प्रक्रिया जारी है। सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता मनोज ठाकुर को आय से अधिक संपत्ति मामले में 5 साल की सजा मिल चुकी है।

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग:

सरायकेला के कार्यपालक अभियंता रंजीत कुमार ठाकुर पर बिना टेंडर कार्य कराने का आरोप है। वहीं संजय कुमार पर जल जीवन मिशन के कार्यों में गड़बड़ी और लापरवाही के आरोप सामने आए हैं।

बिजली विभाग:

ट्रांसफार्मर खरीद और संविदा बहाली में अनियमितताओं को लेकर जूनियर और असिस्टेंट इंजीनियर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की निगरानी में हैं।

बड़े अधिकारियों पर भी शिकंजा:

मामले में कई वरिष्ठ और रिटायर्ड इंजीनियरों के नाम सामने आए हैं। इनमें पूर्व मुख्य अभियंता वीरेंद्र कुमार राम, सिंगरई तुती, राजीव लोचन और सुरेंद्र कुमार शामिल हैं, जिन पर टेंडर घोटाले, कमीशनखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगे हैं।

लगातार हो रही कार्रवाई से यह संकेत मिल रहा है कि झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती बढ़ गई है और आने वाले समय में और बड़े खुलासे संभव हैं।

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