Hazaribagh: हजारीबाग मामले को लेकर कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और बड़कागांव की पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद ने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पुलिस की पूरी कार्रवाई को ‘सुनियोजित पटकथा’ करार देते हुए कई अहम बिंदुओं पर जवाब मांगा है।
रांची के प्रेस क्लब, मोरहाबादी में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रस्तावित बंदी और मशाल जुलूस को वापस ले लिया गया है, लेकिन जांच में जो विसंगतियां सामने आ रही हैं, उन पर वह चुप नहीं बैठेंगी। उन्होंने डीजीपी तादाशा मिश्रा को संबोधित करते हुए पुलिस की कार्यशैली पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
अम्बा प्रसाद ने मृतका की मां को ही आरोपी बनाए जाने पर हैरानी जताते हुए सवाल उठाया कि क्या कोई व्यक्ति एक साथ सूचक और अभियुक्त हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं यह किसी साजिश के तहत पीड़ित परिवार को सरकारी लाभ से वंचित करने की कोशिश तो नहीं है।
एफआईआर में दर्ज धनेश्वर पासवान की भूमिका पर भी उन्होंने सवाल उठाए और पूछा कि वह अब तक फरार क्यों है तथा पुलिस उसे पकड़ने में क्यों नाकाम रही। इसके साथ ही उन्होंने जांच की प्रक्रिया पर भी प्रश्न खड़े करते हुए कहा कि अब तक डीएनए टेस्ट नहीं कराया गया है, फिर किन तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ की जा रही है।
उन्होंने भीम राम नामक आरोपी को लेकर भी आरोप लगाया कि पुलिस की जांच उसे बचाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वहीं, 13 टीमों के गठन और लगातार छापेमारी के पुलिस दावे को उन्होंने हास्यास्पद बताते हुए कहा कि जब आरोपी एक ही गांव में मौजूद थे, तो इतनी बड़ी कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी।
अम्बा प्रसाद ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने आने तक अपनी आवाज उठाती रहेंगी।