हजारीबाग: जिले के कटकमसांडी प्रखंड में एक बार फिर सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद सामने आया है। मामला राजकीयकृत उर्दू प्राथमिक विद्यालय बलियांद की जमीन से जुड़ा है, जहां कुछ लोगों पर स्कूल की भूमि को अवैध रूप से बेचने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन समिति ने इस मामले को गंभीर बताते हुए हजारीबाग के उपायुक्त को आवेदन सौंपा है। आवेदन में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर विद्यालय की जमीन को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
दान में मिली जमीन पर बना विद्यालय
ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन गांव के पूर्वजों ने शिक्षा के उद्देश्य से दान में दी थी। इसी जमीन पर सरकारी स्तर पर विद्यालय का निर्माण कराया गया और वर्षों से यहां बच्चों की पढ़ाई चल रही है। इसके बावजूद कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा इस जमीन को बेचने की साजिश रचे जाने की बात सामने आने से गांव में आक्रोश है।
विद्यालय प्रबंधन समिति का कहना है कि यह भूमि पूरी तरह स्कूल की संपत्ति है और इसका उपयोग केवल शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए ही होना चाहिए। यदि इस जमीन पर कब्जा या बिक्री की कोशिश होती है तो इससे बच्चों की पढ़ाई और स्कूल के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
शिकायत में जमीन का पूरा ब्योरा
उपायुक्त को दिए गए आवेदन में जमीन का विस्तृत विवरण भी दिया गया है। इसके अनुसार मौजा बलियाचंद, हंस संख्या 08, खाता संख्या 18 के अंतर्गत प्लॉट संख्या 700 से 711 के साथ-साथ 74/1388, 697, 698 और 699 को विद्यालय की जमीन बताया गया है।
इस शिकायत पत्र पर विद्यालय प्रबंधन समिति, सरस्वती वाहिनी माता समिति के पदाधिकारियों समेत कई ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं। आवेदन की प्रतिलिपि जिला शिक्षा अधीक्षक, अनुमंडल पदाधिकारी, अंचल अधिकारी और संबंधित थाना प्रभारी को भी भेजी गई है।
अवैध निर्माण पर प्रशासन की कार्रवाई
इसी बीच कटकमसांडी प्रखंड में ही सरकारी जमीन पर बने एक अवैध चारदीवारी को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। अंचल अधिकारी अनिल कुमार गुप्ता के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने जेसीबी की मदद से अवैध निर्माण को हटाया।
हालांकि जिन लोगों पर कब्जे का आरोप लगाया जा रहा है, उनका कहना है कि जमीन की बंदोबस्ती उनके नाम पर है और उन्होंने किसी तरह का अवैध कब्जा नहीं किया है। फिलहाल मामले को लेकर इलाके में चर्चा तेज है और लोगों की नजर प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।