Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और आपराधिक कानून से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि तलाक के बाद पूर्व पति को अपनी तलाकशुदा पत्नी से दोबारा निकाह करने के लिए कानूनी तौर पर मजबूर नहीं किया जा सकता। यह मामला गिरिडीह जिले से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, एक मुस्लिम दंपत्ति के बीच तलाक हो गया था। इसके बाद महिला ने पहले पति से दोबारा निकाह की इच्छा जताई। इसके लिए उसने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत दूसरे व्यक्ति से विवाह किया। हालांकि, प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब महिला ने अपने पूर्व पति से दोबारा निकाह करने की मांग की, तो पति ने साफ तौर पर इनकार कर दिया। इसके बाद महिला ने पूर्व पति के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई।
मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में हुई। कोर्ट ने आरोपी पूर्व पति को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि तलाक के बाद दोबारा शादी करना पूर्व पति की कानूनी बाध्यता नहीं है।अदालत ने माना कि पूर्व पति का दोबारा निकाह से इनकार करना अपने आप में कोई संज्ञेय अपराध या कानूनी गलती नहीं है। मुस्लिम पर्सनल लॉ या सामान्य आपराधिक कानून किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध दोबारा विवाह के लिए बाध्य नहीं करता। हाईकोर्ट ने आरोपी को 25-25 हजार रुपये के दो निजी मुचलकों पर अग्रिम जमानत की सुविधा प्रदान की।
इस फैसले के जरिए अदालत ने साफ किया कि तलाक और उसके बाद की वैवाहिक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के खिलाफ पूर्व पत्नी से दोबारा शादी करने के लिए आपराधिक कार्रवाई के दबाव में नहीं लाया जा सकता।