रांची: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी, जबकि शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों में क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
विधायकों के मतदान पर नजर रखने और किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए सभी प्रमुख दलों ने अपने-अपने एजेंट और पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। कांग्रेस ने इस बार स्थानीय नेताओं के बजाय दिल्ली से प्रदेश प्रभारी के. राजू और सिरिबेला प्रसाद को पार्टी एजेंट बनाकर भेजा है। मतदान के दौरान कांग्रेस विधायक इन्हीं अधिकृत प्रतिनिधियों को अपना मतपत्र दिखाएंगे।
उधर, निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी को एनडीए का समर्थन मिलने के बाद भाजपा ने भी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने मतदान और मतगणना प्रक्रिया की निगरानी के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। इस चुनाव में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी दांव पर मानी जा रही है।
झामुमो ने अपने विधायकों की एकजुटता बनाए रखने के लिए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और महासचिव विनोद कुमार पांडेय को पार्टी एजेंट बनाया है। वहीं पोलिंग एजेंट की जिम्मेदारी मिथिलेश ठाकुर और फागू बेसरा को दी गई है।
गठबंधन की मजबूती बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो पर भी है। वहीं राजद और भाकपा माले ने भी अपने वरिष्ठ नेताओं को मतदान प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव केवल दो राज्यसभा सीटों का फैसला नहीं करेगा, बल्कि इससे दलों के भीतर अनुशासन, एकजुटता और नेतृत्व क्षमता की भी परीक्षा होगी।