रांची: चास–बोकारो एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला शिक्षा और सिख समुदाय से जुड़ी प्रतिष्ठित संस्था गुरु गोबिंद एजुकेशनल सोसायटी, बोकारो का है। स्थानीय सिख समुदाय के कई सदस्यों ने सोसायटी के वर्तमान पदाधिकारियों, विशेषकर तरसेम सिंह, पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और पारदर्शी चुनाव कराने की मांग की है।
समुदाय के लोगों का आरोप है कि सोसायटी पर पिछले 15 से 20 वर्षों से एक ही समूह का कब्जा बना हुआ है। उनका कहना है कि तरसेम सिंह लंबे समय से महत्वपूर्ण पदों पर बने हुए हैं और सोसायटी के पुनः पंजीकरण के दौरान पुराने उपनियमों में बदलाव कर ऐसे नए नियम लागू किए गए, जो निष्पक्षता के विपरीत प्रतीत होते हैं।
आरोप यह भी लगाया गया है कि सोसायटी के वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही और करोड़ों रुपये के दुरुपयोग की आशंका है। कुछ सदस्यों ने यह भी कहा कि परिवार के लोगों को बिना आवश्यक योग्यता के संस्था से जुड़े स्कूल में नियुक्त किया गया है और उन्हें वेतन भी दिया जा रहा है।
समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति इन मुद्दों को उठाता है या प्रशासन को शिकायत देता है, तो उसके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराने की कोशिश की जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रभावशाली पहुंच के कारण मामलों को दबा दिया जाता है।
मीडिया से बातचीत में सिख समाज के लोगों ने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना के बाद जब सिख परिवार यहां आकर बसे, तब अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से इस सोसायटी की स्थापना की गई थी। बोकारो स्टील प्लांट द्वारा प्रदान की गई भूमि पर स्थापित यह संस्था आज लगभग 7,000 बच्चों को शिक्षा दे रही है। ऐसे में इसकी पारदर्शिता और निष्पक्ष संचालन अत्यंत आवश्यक है।
समुदाय ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूर्व में गठित एड-हॉक कमेटी को स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाए और जब तक सोसायटी का निष्पक्ष चुनाव नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान पदाधिकारियों का हस्तक्षेप रोका जाए। साथ ही, पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि समुदाय का विश्वास बहाल हो सके।
यह मामला केवल एक संस्था का नहीं, बल्कि समुदाय की पहचान, बच्चों के भविष्य और सामाजिक विश्वास से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मांग पर क्या कदम उठाता है।